देश की विभिन्न प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए नए साल 2015 में बड़ा तोहफा मिल सकता है। केंद्र सरकार सभी प्राइवेट संस्थानों के कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 15000 रुपए प्रति माह कर सकती है।
इंडिया टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, मोदी सरकार अब कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन दोगुना यानी 8 हजार से 15 हजार प्रति माह करने का विचार कर रही है। इस संबंध में श्रम मंत्रालय ने रविवार को राज्य सरकार के अधिकारियों से मीटिंग कर न्यूनतम वेतन बढ़ाने का संकेत दिया है।
मीटिंग में श्रम एवं कार्मिक मंत्रालय ने कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 में जरूरी संशोधन के लिए भी संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रियों का एक समूह पहले से ही कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त श्रम सचिव अरुण कुमार सिन्हा ने कहा कि राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी अधिनियम संशोधन कर कुछ ऐसे नियम जोड़े जाएंगे जिससे कि राज्य सरकारें भी वेतन बढ़ाने के लिए बने नए कानून का पालन कर सकें।
सिन्हा ने कहा कि ऐसा देखा गया है कि केंद्र सरकार कुछ दिशा-निर्देशों का पालन करने में राज्य सरकारें इधर-उधर करती हैं।
वहीं केंद्र सरकार के अन्य अधिकारी ने भी वेतन बढ़ाने की बात को सही ठहराया है और कानून में जरूरी संशोधन कर न्यूनतम वेतन बढ़ाए जाने की संभावनाओं की पुष्टि की है।
हालांकि उद्योगों से जुड़े कुछ लेबर एक्सपर्ट इस प्रकार की खबरों से खुश नहीं हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सेलरी बढ़ाने के लिए कानून में संशोधन सरकार के लिए संभव नहीं होगा। और सरकार अगर ऐसा करती भी है तो उसके लिए नई चुनौतियां खड़ी होंगी।
गौरतलब है कि इससे पहले मोदी सरकार ने श्रम कानूनों को आसान बनाकर उद्योगपतियों को राहत दी थी, लेकिन अगर सरकार अब कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाती है तो काफी हद तक देश से गरीबी हटाने में मदद मिलेगी।
वर्तमान में अभी न्यूनतम मजदूरी अभी राज्यों में अलग-अलग है।
Source: http://goo.gl/swLrO4

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