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Thursday, 25 July 2013

मलबे में सड़ रहीं लाशें, अब भी उत्‍तराखंड का ये है हाल
































चमोली जिले में बुधवार सुबह नंदप्रयाग के पास दो जगह बादल फट गए जि‍ससे कई गांवों में तबाही आ गई। आपदा में एक महिला समेत दो लोगों की मौत हो गई, वहीं एक युवती अभी लापता है। ग्रामीण घर छोड़ सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। पांच सौ लोगों ने स्कूल और प्रतीक्षालय में शरण ली है।

बुधवार सुबह लगभग साढ़े पांच बजे सुनाली गांव के ऊपर पहाड़ी पर बादल फटा। इससे आए मलबे ने आसपास के गांवों में भारी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद सात बजे तेफना-बांतोली गांव के पास से गुजर रहे गदेरे में बादल फटने से इन दोनों गांवों में तबाही मची। ग्रामीणों को विश्वास नहीं हो रहा कि गांवों के किनारे से होकर जाने वाला बरसाती गदेरा इतनी तबाही मचाएगा। बादल फटने से अचानक गदेरे में पानी व मलबा बढ़ गया। तेफना, बांतोली में अफरातफरी मच गई।

कुछ ही देर में गदेरा बांतोली गांव को छूकर तेफना गांव में घुस गया। बांतोली में 28 वर्षीय रीना देवी गौशाला में ही बह गई। रीना की लाश 150 मीटर दूर मिली।

तेफना में मलबा और पानी घुसने से किरन (19) पुत्री रामलाल नैथवाल बह गई। गांव के ही सुलतान सिंह कठैत (50) गदेरे के रौद्र रूप को देख सुरक्षित स्थान की ओर भागे, लेकिन वे रास्ते में बेहोश हो गए और आधे घंटे में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गदेरे ने दस मिनट में यह कहर बरपाया। गांवों में कई गौशालाएं भी मवेशियों सहित बह गईं। कई पशुओं के शव यहां-वहां पड़े पाए गए। इन दोनों गांवों में कम से कम 16 घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं।

सुनाली गांव में बादल फटने से 18 मकान जमींदोज हो गए। 18 घर रहने लायक नहीं रहे। वहीं जेटी मल्ली में चार मकान मलबे में दबने के साथ ही बिराजकुंज में एक घर गदेरे में बह गया।

तेफना गांव के 74 वर्षीय दीवान सिंह रावत ने बताया कि गदेरे से महिलाएं खेतों में सिंचाई के लिए नहर बनाती थीं, लेकिन आज गदेरे के स्वरूप को देख डर लग रहा है। उन्होंने बताया कि वे पानी के नल के सहारे जीवित बच पाए हैं। गदेरे में बही किरन भीमतला गांव की रहने वाली थी, जो इन दिनों ननिहाल तेफना आई थी।

दीवान सिंह रावत ने बताया कि गदेरे में पानी बढ़ने से कि‍रन दूसरे कमरे में रखे मोबाइल फोन लेने के लिए बाहर आई, लेकिन तब तक गदेरे ने उसे अपने आगोश में ले लिया। किरन की मामी सावित्री देवी यह देख बेहोश हो गई।

तेफना गांव के हर्षवर्द्धन बिष्ट ने बताया कि गदेरे में पेड़ और पत्थर गोलाकार में बह रहे थे। बांतोली गांव के 80 वर्षीय महिपाल सिंह का कहना है कि आठ दशक में गदेरे का ऐसा स्वरुप पहली बार देखने को मिला है।

ये हैं बंद मार्ग

सड़क          बाधित स्थल
मयाली-गुप्तकाशी किमी 46
रुद्रप्रयाग-पोखरी किमी 17
बांसवाड़ा-मोहनखाल किमी 12
कुंड-गोपेश्वर            किमी 70
रुद्रपयाग-चोपड़ा किमी 24
कांडई-कमोल्डी कई स्थानों पर
विजयनगर-तैला किमी 5 व 7
अगस्त्यमुनि-गणेशनगर किमी 1 व 2
भीरी-परकंडी जगह-जगह

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