स्पॉट फिक्सिंग में गिरफ्तार तेज गेंदबाज एस श्रीसंत की दर्ज एफआईआर की कॉपी की मांग सोमवार को खारिज हो गई।
दिल्ली की एक अदालत में श्रीसंत के वकील ने एफआईआर की कांपी की मांग की थी जिसे मेट्रोपोलिशन मजिस्ट्रेट गौरव राव ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि इसके लिए अभियोजन पक्ष ने ऐसा नहीं करने की मांग की थी।
साथ ही सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से कोई (श्रीसंत का वकील) उपस्थित भी नहीं था। दिल्ली पुलिस ने 16 मई को श्रीसंत समेत 14 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद 5 दिन की रिमांड पर लिया था।
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श्रीसंत के वकील ने एफआईआर की कॉपी के लिए 17 मई को चीफ मेट्रोपोलिशन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) लोकेश कुमार शर्मा की अदालत में गुहार लगाई थी। वकील के अनुसार एफआईआर की कॉपी मिलने से उसे अपने मुवक्किल की ओर से पक्ष रखने में मदद मिलेगी।
हालांकि सीएमएम सोमवार को अदालत में नहीं आए जिस कारण यह मामला दूसरे मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भेज दिया गया। जिन्होंने वकील के उपस्थित न होने की सूरत में श्रीसंत की याचिका खारिज कर दी।
इससे पूर्व सीएमएम लोकेश ने क्रिकेटरों और अन्य आरोपियों को एफआईआर की कॉपी देखने की अनुमति प्रदान की थी।
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पुलिस रिमांड के लिए 7 दिन की मांग करने वाली दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि श्रीसंत और उनकी आईपीएल टीम के दो साथियों अजित चंडीला व अंकित चव्हाण को मुंबई में पिछले हफ्ते गिरफ्तार किया था। इन तीनों ने हर ओवर में प्रत्येक बॉल और रन पर स्पॉट फिक्सिंग की।
स्पॉट फिक्सिंग में लिप्त होने के आरोप में बीसीसीआई ने इन तीनों क्रिकेटरों को निलंबित कर रखा है। वहीं राजस्थान रॉयल्स ने भी आज उनके साथ धोखा करने के कारण करार रद कर दिया है।

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