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Friday, 18 January 2013

स्तन कैंसर: दवा कारगर या स्तन हटवाएं?

स्तन कैंसर महिलाओं में तेजी से फैलती बीमारी है। जिन महिलाओं में स्तन कैंसर होने की आशंका जेनेटिक या आनुवांशिक तौर पर ज्यादा होती है।

आमतौर पर उनके पास दो ही विकल्प होते हैं, स्तन हटवाना या ये उम्मीद करना कि ये बीमारी उन्हें न हो। लेकिन जल्द ही ऐसी महिलाओं के लिए एक वैकल्पिक दवा सामने आ सकती है।

इंग्लैंड और वेल्स में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ और क्लिनिकल एक्सिलेंस का कहना है कि ऐसी महिलाओं को पांच साल के लिए टेमोऑक्सिफेन या रेलोऑक्सिफेन दवा देनी चाहिए ताकि स्तन कैंसर होने की आशंका को कम किया जा सके। हालांकि स्तन हटवाने और दवा खाने के बीच विकल्प का चयन करना महिलाओं के लिए शायद इतना आसान नहीं है।

'अपनी जान खुद बचाई'
लंदन में रहने वाली ऐमा पारलन्स को तीन साल पहले पता चला कि उनके शरीर में बीआरसीए1 नाम का जीन है जिससे स्तन कैंसर होने की आशंका बहुत बढ़ जाती है। ऐमा ने विचार-विमर्श के बाद अपने स्तन हटवाने का फैसला किया ताकि भविष्य में उन्हें ये कैंसर न हो।

अब ऐमा जानती हैं कि स्तन कैंसर से निपटने के लिए आने वाले दिनों में दवाओं का विकल्प हो सकता है। लेकिन उन्हें स्तन हटवाने के अपने फैसले पर कोई अफसोस नहीं है। वो कहती हैं कि ये इतना बुरा नहीं है जितना सुनने में लगता है। मैं खुद को बहुत सशक्त महसूस कर रही हूं क्योंकि मैंने अपनी जान बचाई है।

30 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में से कइयों में स्तन कैंसर होने की आशंका अधिक होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दवाओं से स्तन कैंसर की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है। प्रोफेसर गैरथ इवान्स कहते हैं कि सर्जरी स्तन कैंसर का रिस्क 90 से 95 फीसदी कम कर देती है। लेकिन खतरा पूरी तरह से टलता नहीं है। स्तन के हर सेल या कोशिका को हटाना संभव नहीं है।

अगर महिला स्तन हटवाती है पर निपल नहीं तो कैंसर का खतरा केवल 90 फीसदी ही कम होता है। लेकिन सही शोध से टैमीऑक्सिफेन दवा लेकर महिलाएं फायदा उठा सकती हैं। लेकिन ये दवा हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं है और इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं। और अगर आप मां बनना चाहती हैं तो गर्भधारण की प्रक्रिया से तीन महीने पहले ये दवा लेनी बंद करनी होगी।

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