नई दिल्ली। शेर ने एक जंगल का एक छोर छोड़ा तो क्या हुआ, जंगल का राजा तो अब भी वही है। यही चीज आज क्रिकेट पर भी बखूबी लागू होती है जिसका शेर सचिन तेंदुलकर एक बार फिर तैयार है खिताबी जंग के लिए, इस बार अपनी घरेलू टीम के लिए। वानखेड़े स्टेडियम पर होने वाले रणजी फाइनल में 39 वर्षीय सचिन सौराष्ट्र के खिलाफ अजीत अगरकर की अगुवाई वाली मुंबई टीम को 40वां रणजी खिताब दिलाने के इरादे से उतरेंगे।
सचिन तेंदुलकर ने भले ही वनडे क्रिकेट से संन्यास ले लिया हो लेकिन वह जहां जाते हैं अपने रुतबे व मेहनत से जीत और रिकार्ड को करीब लाने का काम करते हैं। बीसीसीआई ने यह फैसला कर लिया है कि रणजी फाइनल अब मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम पर ही होगा जिसका मतलब है कि मुंबई 44वीं बार रणजी फाइनल में अपना 40वां खिताब जीतने, अपने ही मैदान पर उतरेगी जो कि 75 साल बाद रणजी फाइनल में पहुंची सौराष्ट्र की टीम का मनोबल कम करने के लिए काफी होगा। अजीत अगरकर की अगुवाई वाली टीम काफी लंबे समय के बाद देश व दुनिया के सबसे बेहतरीन व सम्मानित क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की मौजूदगी में इस खिताब को दोबारा हासिल करने उतरेगी। सचिन तेंदुलकर भी आस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में उतरने से पहले इस मौके पर कुछ बड़ा करने से चूकना नहीं चाहेंगे।
आखिरी बार सचिन 2009 सीजन में उत्तर प्रदेश के खिलाफ रणजी फाइनल खेलने उतरे थे जहां सचिन का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और उन्हें भुवनेश्वर कुमार ने पहली बार रणजी में डक पर आउट किया था जबकि दूसरी पारी में भी वह मात्र 4 रन ही बना सके थे लेकिन इस बार मास्टर ब्लास्टर जबसे रणजी खेलने उतरे हैं उनके चेहरे पर नया जोश नजर आ रहा है और इस दौरान वह कुछ अच्छी पारियां भी खेल चुके हैं। सचिन ने अब तक पांच बार रणजी फाइनल खेला है जिनमें सिर्फ एक बार 1991 में उनकी टीम को हार का सामना करना पड़ा था। वह रणजी फाइनल सचिन का पहला फाइनल था और उस समय उनकी उम्र भी 17-18 साल की ही थी। उसके बाद 1995 में पंजाब के खिलाफ फाइनल में उन्होंने दोनों पारियों में शतक जड़े थे और मुंबई पहली पारी में जीत गई थी। फिर साल 2000 में वह हैदराबाद के खिलाफ रणजी फाइनल खेले जहां उन्होंने पहली पारी में अर्धशतक जबकि दूसरी पारी में 128 रनों की बेमिसाल पारी खेली थी। मुंबई ने वह मैच 297 रनों से जीता था। इसके बाद 2007 में बंगाल के खिलाफ फाइनल में उन्होंने पहली पारी में 105 रन ठोंके जबकि दूसरी पारी में 43 रन बनाए और मुंबई ने वह मैच 132 रनों से जीता और अंत में आखिरी बार वह 2009 में खेले जहां उनका बल्ला बिल्कुल शांत दिखा हालांकि मुंबई को 243 रनों से विशाल जीत मिली। इन पांच फाइनल मैचों में चार मैच वानखेड़े स्टेडियम पर ही हुए थे और इस बार भी मैदान वही है। सचिन की उम्र चाहे जो हो लेकिन पवेलियन में उनकी मौजूदगी ही युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और विरोधी खिलाड़ियों में खौफ पैदा करने के लिए काफी होगी, इस दौरान अगर वह कुछ बड़ा करते हैं तो एक बार फिर वही साबित हो जाएगा जैसा कि सचिन हमेशा से कहते आए हैं, 'जब तक आप खेल का लुत्फ उठा रहे हैं उम्र से इसका कोई लेना-देना नहीं है।'

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