डोले बनाने की ख्वाहिश रखते हैं लेकिन कसरत के लिए पूरा समय नहीं निकाल पाते तो कोई बात नहीं। हाल में हुए शोध की मानें तो महज कसरत के बारे में सोच लेने से ही मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर फिट रहता है।
ओहियो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में माना है कि कसरत के बारे में सोचने के दौरान दिमाग और मांसपेशियों में खास तरह का संपर्क होता है जो मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
जर्नल ऑफ न्यूरोफीजियोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में शोधकर्ताओं ने जिम जाने और जिम में कसरत के बारे में सोचने का समान रूप से फायदा माना है।
इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं ने यह भी माना है कि इस विधि से न केवल बॉडी फिट हो सकती है बल्कि एजिंग और डिप्रेशन से भी बचाव हो सकता है।
शोध के दौरान प्रतिभागियों को हफ्ते के पांच दिन 11 मिनट तक कसरत के बारे में सोचने के लिए कहा गया और पाया गया कि अधिक कल्पनाशक्ति वाले लोगों की मसल्स भी अधिक मजबूत हुई हैं।
हालांकि यह कसरत का पूरी तरह से विकल्प हो सकता है, इस बारे में अभी शोधकर्ताओं को काफी अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
ओहियो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में माना है कि कसरत के बारे में सोचने के दौरान दिमाग और मांसपेशियों में खास तरह का संपर्क होता है जो मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
जर्नल ऑफ न्यूरोफीजियोलॉजी में प्रकाशित इस शोध में शोधकर्ताओं ने जिम जाने और जिम में कसरत के बारे में सोचने का समान रूप से फायदा माना है।
इतना ही नहीं, शोधकर्ताओं ने यह भी माना है कि इस विधि से न केवल बॉडी फिट हो सकती है बल्कि एजिंग और डिप्रेशन से भी बचाव हो सकता है।
शोध के दौरान प्रतिभागियों को हफ्ते के पांच दिन 11 मिनट तक कसरत के बारे में सोचने के लिए कहा गया और पाया गया कि अधिक कल्पनाशक्ति वाले लोगों की मसल्स भी अधिक मजबूत हुई हैं।
हालांकि यह कसरत का पूरी तरह से विकल्प हो सकता है, इस बारे में अभी शोधकर्ताओं को काफी अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
Source: http://goo.gl/BvSNUo


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