कुदरत का कहर टूटने के बाद पहली बार केदारनाथ की तबाही का वीडियो सामने आया है. इस वीडियो से पता चलता है कि मंदिर को छोड़कर कुछ भी सलामत नहीं बचा. कई फीट ऊंची नंदी की मूर्ति अब इंसानी कद से भी छोटी हो गई है|
जल प्रलय ने केदारनाथ में सब कुछ तबाह कर दिया है. ताजा वीडियो में इलाके में सिर्फ मलबे का ढेर, चारों तरफ 7 से 8 फीट तक कीचड़ और मिट्टी ही मिट्टी दिख रही है|
यही नहीं, केदारनाथ में आए सैलाब में अब भी सैकड़ों श्रद्धालुओं की लाशें दबी हुईं हैं. ताजा वीडियो में जगह-जगह तबाही के निशान दिखाई दे रहे हैं और मंदिर परिसर के पास बने लॉज और होटल भी पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं|
उधर, चश्मदीदों का कहना है कि बाढ़ और मलबे में ढेरों लोग बह गए हैं. जिन लोगों ने कुदरत के कहर को अपनी आंखों से देखा है उनका कहना है कि जिस जगह से भी तबाही गुजरी , वहां जिंदगी का नामो-निशान तक नहीं बचा|
तबाही की एक और नई तस्वीर हेमकुंड साहिब यात्रा के रास्ते में गोविंदघाट से आई है. दिल दहलाने वाली इस तस्वीर से पता चलता है कि कैसे सैलाब गाडियों को बहा कर ले गया. यहां के होटल की एक पार्किंग में खडी गाड़ी सैलाब में तिनके की तरह बह कर निकल गई. वहां खड़े लोगों ने मोबाइल मे इस वाक्ये को रिकॉर्ड कर लिया|
उत्तराखंड में कुदरत का कहर करीब से देखकर कई लोग अपने घर लौटने में कामयाब हुए हैं. केदारनाथ से बचकर लौटे बिहार के पूर्व मंत्री अश्विनी चौबे ने भी अपनी आपबीती सुनाई. अश्विनी चौबे के कई रिश्तेदार पानी में बह गए. उन्होंने आशंका जताई कि 15 से 20 हजार लोगों की जान इस आपदा में गई होगी.
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोरखरियाल निशंक ने भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायाजा लिया. उनका कहना है कि कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया है जिसे देखकर रोंगटे खडे हो जाते हैं|
कुदरती आपदा से प्रभावित उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य जारी हैं. आईटीबीपी ने केदारनाथ में फंसे तमाम लोगों को बचाकर निकाल लिया है. आईटीबीपी के मुताबिक, 'तकरीबन 250 लोगों को गौरीकुंड इलाके से एयरलिफ्ट किया गया है, जबकि गोविंदघाट- घंघारिया इलाके से 1500 लोग निकाले गए हैं. बद्रीनाथ के रास्ते में पड़नेवाले लामबगड़ इलाके से 1 हजार लोग बचाए गए हैं.'
गुप्तकाशी में बड़ी संख्या में फंसे लोगों को वहां से निकालकर सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है. सेना के हेलिकॉप्टरो से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया. बचाए गए लोगों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं. सेना और एयरफोर्स के 45 हेलिकॉप्टरों और 10 हजार जवानों को राहत और बचाव कार्यों में तैनात किया गया है|

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